बंगाल में पड़ा था अकाल, भूख से बिलखते बच्चों को नदी में फेंक रहे थे लोग


इंटरनेशनल डेस्क.73 साल पहले बंगाल (मौजूदा बांग्लादेश, भारत का पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा) ने अकाल का वो भयानक दौर देखा था, जिसमें करीब 30 लाख लोगों ने भूख से तड़पकर अपनी जान दे दी थी। ये सेकंड वर्ल्ड वॉर का दौर था। माना जाता है कि उस वक्त अकाल की वजह अनाज के उत्पादन का घटना था, जबकि बंगाल से लगातार अनाज का एक्सपोर्ट हो रहा था। हालांकि, एक्सपर्ट्स के तर्क इससे अलग हैं। अकाल से ऐसे थे हालात...
 
 
राइटर मधुश्री मुखर्जी ने उस अकाल से बच निकले कुछ लोगों को खोज उनसे बातचीत के आधार पर अपनी किताब में लिखा है कि उस वक्त हालात ऐसे थे कि लोग भूख से तड़पते अपने बच्चों को नदी में फेंक रहे थे। न जाने ही कितने लोगों ने ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जान दे दी थी। हालात ये थे कि लोग पत्तियां और घास खाकर जिंदा थे। लोगों में सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करने का भी दम नहीं बचा था। इस अकाल से वही लोग बचे जो नौकरी की तलाश में कोलकाता (कलकत्ता) चले आए थे या वे महिलाएं जिन्होंने परिवार को पालने के लिए मजबूरी में प्रॉस्टिट्यूशन का पेशा शुरू कर दिया।
 
अनाज की नहीं थी कोई कमी
ये सिर्फ कोई प्राकृतिक त्रासदी नहीं थी, बल्कि ये इंसानों की बनाई हुई थी। ये सच है कि जनवरी 1943 में आए तूफान ने बंगाल में चावल की फसल को नुकसान पहुंचाया था, लेकिन इसके बावजूद अनाज का प्रोडक्शन घटा नहीं था। इस बारे में लिखने वाले ऑस्ट्रेलियन साइंटिस्ट और सोशल एक्टिविस्ट डॉ. गिडोन पोल्या का मानना है कि बंगाल का अकाल 'मानवनिर्मित होलोकास्ट' था। इसके पीछे अंग्रेज सरकार की नीतियां जिम्मेदार थीं। इस साल बंगाल में अनाज की पैदावार बहुत अच्छी हुई थी, लेकिन अंग्रेजों ने मुनाफे के लिए भारी मात्रा में अनाज ब्रिटेन भेजना शुरू कर दिया और इसी के चलते बंगाल में अनाज की कमी हुई।
 
रोकी जा सकती थी त्रासदी
जाने-माने अर्थशात्री अमर्त्य सेन का भी मानना है कि 1943 में अनाज के प्रोडक्शन में कोई खास कमी नहीं आई थी, बल्कि 1941 की तुलना में प्रोडक्शन पहले से ज्यादा था। इसके लिए ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल को सबसे ज्यादा जिम्मेदार बताया जाता है, जिन्होंने स्थिति से वाकिफ होने के बाद भी अमेरिका और कनाडा के इमरजेंसी फूड सप्लाई के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इन्होंने प्रभावित राज्यों की मदद की पेशकश की थी। जानकारों का कहना है कि चर्चिल अगर चाहते तो इस त्रासदी को रोका जा सकता था। वहीं, बर्मा (मौजूदा म्यांमार) पर जापान के हमले को भी इसकी वजह माना जाता है। कहा जाता है कि जापान के हमले के चलते बर्मा से भारत में चावल की सप्लाई बंद हो गई थी।
 
(11 जनवरी 1972 में पूर्वी पाकिस्तान बंगलादेश के रूप में स्वतंत्र देश बना था। इस मौके पर हम बांग्लादेश की खास जगहों, इंडस्ट्री, लाइफस्टाइल और वहां की मशहूर घटनाओं के बारे में अपनी अलग-अलग रिपोर्ट में बता रहे हैं।)

आगे की स्लाइड्स में देखें, बंगाल में अकाल के उस भयानक दौर की PHOTOS...

1943 में बंगाल में आए भीषण अकाल के दौरान सड़क के किनारे भूख से तड़पता बच्चा।

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अकाल में करीब 30 लाख लोगों ने भूख से तड़पकर अपनी जान दे दी थी।

उस वक्त हालात ऐसे थे कि लोग भूख से तड़पते अपने बच्चों को नदी में फेंक रहे थे।

लोगों में सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करने का भी दम नहीं बचा था।




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